एक लोहार दरबार में बख्तर बनाकर लाया। बादशाह ने पूछा यह बख्तर कैसा है मजबूत है जहाँपनाह। लोहार ने निवेदन किया। यह तुम्हीं ने बनाया है जी हाँ । हम इसकी मजबूती देखना चाहते हैं।

अगर यह मजबूत हुआ तो तुम्हें इनाम देंगे कमजोर हुआ तो दूसरा बनाकर लाना होगा। ऐसा कहकर बादशाह ने वह बख्तर एक पुतले को पहना दिया और तलवार हाथ में लेकर ऐसा वार किया कि बख्तर कट गया। बादशाह बोले यह तो बड़ा कमजोर है एक ही वार में कट गया। दूसरा बनाकर लाओ। लोहार चला गया। और वह दूसरा बख्तर बनाकर ले आया।

बेचारे ने पूरी मेहनत से सात दिनों में वह बख्तर तैयार किया था। बादशाह के पास लाया तो बादशाह ने उसे भी पुतले को पहनवाया और अपने एक सिपाही से कहा कि पूरी ताकत से वार करो। वह सिपाही भी ताकतवर था। एक ही भरपूर वार में उसने तलवार से वह बख्तर भी काट दिया। लोहार घबरा गया। वह और मजबूत बख्तर नहीं बना सकता था। उसकी मेहनत पैसा और समय बरबाद हो गया।

बादशाह बोला बार बार कमजोर और घटिया बख्तर उठा लाते हो जाओ मजबूत बनाकर लाओ। फिर ऐसा ही लाए तो इनाम तो क्या सजा मिलेगी। अब तुम जा सकते हो। घबराया हुआ लोहार सीधा बीरबल से मिला और अपनी दर्द भरी कहानी सुना दी। वह बीरबल से बोला राजा जी मेरा पैसा वक्त और मेहनत दो बार बेकार जा चुकी है गरीब आदमी हूँ अब तो सजा भी मिलने की बात आ गई है जबकि इससे मजबूत बख्तर बन नहीं सकता। पता नहीं कैसे कट जाता है लड़ाई तक में मेरे बनाए गए बख्तर कारगर साबित हुए हैं।

बीरबल जानते थे कि लड़ाई में इस तरह आराम से अपना बख्तर कोई सैनिक नहीं कटवाता जैसे बुत कटवा लेता है क्योंकि बुत बचाव नहीं कर सकता। बुत पर वार करने वाले को डर नहीं होता है इसलिए बुत को पहनाया गया बख्तर काटा जा सकता है भले ही वह मजबूत हो।

बीरबल ने लोहार को समझाया तुम खुद उसे पहनना और जब कोई वार करे तो तुम भी चीख मारकर झपटना। वार करने वाला झिझक जाएगा। वार कमजोर हो जाएगा और बख्तर नहीं कटेगा। लोहार सारी बात समझ गया। उसने ऐसा ही किया।

वह बख्तर बनाकर ले गया। उसने बीरबल द्वारा बताई गई तरकीब काम में ली। इस बार बख्तर नहीं कटा। बादशाह ने बख्तर स्वीकार कर दिया और फिर उसे इनाम देते हुए पूछा यह तरकीब किसने बताई है उसने बीरबल का नाम बता दिया। बादशाह खुश हो गया। सचमुच बीरबल उनका अनमोल रत्न था।