अकबर बीरबल कहानी एक बार अकबर और बीरबल आम व्यक्ति बनकर घूम रहे थे। उन्होंने देखा एक औरत जो अपने पति से छोटी है वह उसे थप्पड़ मार रही है। अकबर ने बीरबल से पूछा कि उस आदमी को गुस्सा नहीं आया। बीरबल बोला क्योंकि वह अपनी पत्नी की सुनता है। अकबर को विश्वास नहीं हुआ। यह देखने के लिए कि कितने शादीशुदा व्यक्ति अपनी पत्नी की सुनते हैं सभी पतियों को खेत में बुलाया गया।

तब बीरबल बोले जहांपनाह यह जानना चाहते हैं कि आप में से कितने व्यक्ति पत्नी की सलाह मानते हैं। जो व्यक्ति अपनी पत्नी की सुनता है वह उस तरफ चला जाए। एक व्यक्ति को छोड़कर सभी दूसरी तरफ चले गये। अकबर ने चैन की सांस ली चलो एक तो अपनी पत्नी की नहीं सुनता। बीरबल ने उससे पूछा तुम उस तरफ क्यों नहीं गये। उस व्यक्ति ने उत्तर दिया क्योंकि मेरी पत्नी ने कहा था भीड़ की तरफ मत जाना। अकबर अब भी नहीं माने। वह बोले कुछ तो व्यक्ति ऐसे होंगे जो अपनी पत्नी से नहीं दबते होंगे। मैं तुम्हें दो सुंदर घोड़े देता हूं तुम जाओ और अपने साथ कुछ मुर्गियां भी ले जाओ।

अगर तुम्हें पत्नीभक्त व्यक्ति मिले तो उसे मुर्गी देना और कोई ऐसा व्यक्ति मिले जो पत्नीभक्त न हो उसे दोनों घोड़ों में से जो वह चाहे दे देना। बीरबल दिल्ली में घूमे और जहां भी जाते मुर्गी ही देते। एक जगह उन्हें एक पहलवान मिला जो धूप में बैठा था और अपने शरीर की मालिश कर रहा था। बीरबल ने पूछा क्या तुम पत्नीभक्त हो उसने बीरबल को अपने हाथ दिखाते हुए कहा जरा मेरा हाथ पकड़ो और मैं तुम्हें दिखाता हूं। उसने बीरबल का हाथ इतनी जोर से दबाया कि बीरबल की चीख निकल गयी। अगर तुमने मुझसे ऐसा प्रश्न दोबारा पूछा तो मैं तुम्हें मारूंगा।

मुझे कौन प्रभाव में रख सकता है एक छोटी औरत अंदर खाना पका रही थी। बीरबल ने पूछा तुम्हारी पत्नी कहां है वह बोला वह मेरी पत्नी खाना बना रही है। तुम उसे देखो और फिर मुझे देखो और बताओ मालिक कौन है बीरबल बोले देखकर तो यही लगता है कि तुम मालिक हो इसलिए मैं तुम्हें बादशाह की तरफ से उपहार में घोड़ा देना चाहता हूं बताओ कौन सा लोगे सफेद या काला यह सुनकर उस व्यक्ति ने पत्नी की तरफ देखा और पूछा “मैं कौन सा घोड़ा लूं सफेद या काला तब बीरबल बोले “अब तुम्हें मुर्गी मिलेगी तुम्हारे पास शारीरिक ताकत तो है लेकिन तुम कुछ साबित नहीं कर पाए।

शिक्षा ताकत कई प्रकार की होती है। दूसरों को प्रभावित करने के लिए शरीर का माप कोई मायने नहीं रखता। ताकत का होना और उसका उपयोग दोनों अलग चीजें हैं।